Posts

Featured Post

एक ख्वाब - मशीनों का शोर - दिल की कविता

Image
  एक ख्वाब दिन भर साइट की धूल में, खुद को जलाता हूँ, शाम को कागज़ पर, अपनी रूह सजाता हूँ। लोग कहते हैं कि मैं सिर्फ दीवारें चुनता हूँ, उन्हें क्या पता, मैं हर ईंट में एक ख्वाब बुनता हूँ। लोहे के सरियों में उलझी है, मेरी ये जवानी, सीमेंट की महक में दबी है, मेरी हर कहानी। धूप की तपिश में जब, पसीना बहता है मेरा, शब्दों की छाँव में तब, सुकून मैं पाता हूँ। मशीनों के शोर में भी, एक लय ढूँढ लेता हूँ, भीड़ के इस मेले में, मैं खुद को चुन लेता हूँ। काम मेरी रोटी है, मगर कविता मेरी जान है, इसी कश्मकश में मैं, अपनी पहचान बुनता हूँ। 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● इस कविता की कौन सी लाइन ने आपके दिल को सबसे ज़्यादा छुआ ? कमेंट में बताएं। ● क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आपको प्यार कुछ और काम से है और कर कुछ और रहे है ? ● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
Share:

सिर्फ तुमसे प्यार करेंगे

Image
सिर्फ तुमसे प्यार करेंगे तुम कहो तो जीना छोड़ दे, पर क्या तुम कहोगे?? वफा तो निभा नही सकी, क्या मेरे मरने से खुश रहोगे?? जिंदगी में आई थी, एक खूबसूरत अहसास बनकर, अपने झूठी अरमानों से, अपने सच्चाई से लड़कर,, उम्मीद तुमने बहुत बंधाए, मैंने सच माना था, तुम्हारी हर एक अहसास को, मैंने अपना जाना था,, मैं कभी समझ नहीं पाया, तुम मुझसे खेल रही हो,, मुझे मुझसे छीनकर, अंधेरे में धकेल रही हो,, प्यार, वफा की सारी कसमें वादे,  तोड़कर आगे बढ़ जाने की उनकी इरादे,, चलो, हमने मान लिया, कि तुम खुश हो मेरे बिना, धड़क रही है दिल की धड़कन, आंसुओ को रहा है पीना,, पर क्या तुम्हे थोड़ी भी अहसास नही है, इतना प्यार और सम्मान के बाद भी, तुम्हे मुझसे प्यार नही है,, क्या सच में, तुम्हे प्यार नहीं है, दिल से बोलना, दिल और दिमाग की छिपी बातें, आज खुद के सामने खोलना, और पूछना सवाल अपनी अंतरात्मा से, क्या मैंने प्यार निभाए, मोहब्बत सच्चा था उनका, क्या स्वार्थ में मैने उसे मिटाए,, अब तो खो चुके हो ना आशिक अपना, क्रम में और होंगे, एक गया तो दूजा आयेगा, पर वह प्यार हम ना होंगे,, तुम तो जानती हो ना, इस दुनिया की रीत को...

मेरी अधुरी कहानी

Image
  ★ मेरी अधुरी कहानी ★ मेरी किस्मत की स्याही अब मेरी मुट्ठी में है, अपनी तकदीर का हर पन्ना मैं ही लिखूँगी, जो यादें बोझ बनीं, जो लम्हें दर्द दे गए, उन बीते हुए पन्नों को आज फाड़ दिए मैंने...! मगर सच है कि कलम जब काग़ज़ को छूती है, तो हर लफ़्ज़ में तेरा अक्स उभर आता है, मैं लाख चाहूँ कि मुकम्मल हो मेरी दास्ताँ, पर ज़िक्र तेरा, मेरी स्याही को बिखेर जाता है...! तेरे बिन बहारें अब बस एक कोरा सा काग़ज़ हैं, तेरे बिना ये ज़िन्दगी अब अधूरी लिखूँगी, भले ही मैं हूँ अपनी कहानी की एकमात्र नायिका, पर हर मोड़ पर तेरी कमी को ज़रूरी लिखूँगी...! मिटा दिए हैं मैंने वो अध्याय जहाँ हम एक थे, मगर ख़ाली जगहों पर मलाल की कहानी होगी, मेरा वजूद तो रहेगा, मेरा नाम भी ऊँचा होगा, पर मेरी हर कविता में तेरी ही निशानी होगी...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● क्या आप मानते हैं कि 'अधूरी कहानियाँ ही अक्सर सबसे यादगार होती हैं ? ● क्या आपकी कहानी में भी कोई ऐसा 'अधूरा पन्ना' है ? ● इस कविता में आपको सबसे अच्छी लाइन कौन सी लगी ? ● क्या आप भी अपनी कहानी खुद लिखना पसंद करते हैं ? ● अधूरी कह...

विवाह पवित्र बंधन - एक जीवन यात्रा

Image
  ★ पवित्र बंधन: एक जीवन यात्रा ★ दो राहें जब एक हो जाती हैं, रिश्तों में नई खुशबू भर जाती हैं, सात फेरों की अटूट यह माला, जीवन को नया अर्थ दे जाती है...! हल्दी के पीले रंग में सजे दोनों, उमंगों से भरे हैं अब ये मन दोनों, मंगल गीतों की गूँज है चारों ओर, मिलन की घड़ी आई है देखो इस ओर...! यह बंधन है प्रेम का उपहार, त्याग और विश्वास का आधार, सुख-दुःख में जो साथ निभाए, वही सच्चा जीवन का सार...! माथे पर सिंदूर की वह लाली चढ़ी, रिश्तों की नई डोर अब है आगे बढ़ी, मंगलसूत्र की वह पवित्र लड़ी, जीवन की हर मुश्किल में है खड़ी...! गाँठ बंधी है पवित्र रेशम की डोर से, जुड़ गए हैं दो हृदय, एक अनूठे छोर से, अग्नि साक्षी मानकर अब एक राह चलना है, जीवन के हर मोड़ पर, विश्वास का दीपक जलना है...! नहीं यह केवल रस्मों का फेरा, हृदय के दीप का मधुर अंधेरा, हँसते-रोते बीतें ये पल सारे, सपनों का बुनें हम सांचा सुनहरा...! एक दूजे का मान बढ़ाना है, हर मुश्किल को मिलकर हराना है, समर्पण की राह पर चलते हुए, संग जीना और संग मर जाना है...! पवित्रता की मूरत है यह बन्धन, मर्यादाओं से जुड़ा हुआ चंदन, ईश्वर की दी हुई यह ...

मोहब्बत की वो अनकही कहानी

Image
 ★ मोहब्बत की वो अनकही कहानी ★ नजारों में वो सबसे हसीन नजारा था, किस्सा वो हमारी मोहब्बत का सबसे प्यारा था, बड़ी दिलचस्प मेरी चाहत की वो कहानी थी, वो राजा था मेरा, और मैं उसकी रानी थी...! वो साथ था, तो हर दिन एक नया सवेरा था, उसकी बातों में छुपा, खुशियों का बसेरा था, थोड़ा पागल सा था वो, मैं भी उसकी दीवानी थी, बस उसे ही देखूँ, मैंने तो बस यही ठानी थी...! मिजाज़ का जिद्दी था, पर दिल का साफ था, मेरे हर नखरे को सहना, उसका ही इन्साफ था, प्यार उसका ऐसा, जो रूह तक समाता था, मेरी हर एक बेचैनी को, वो पल में सुलझाता था...! वो सबर का दरिया, और मैं थोड़ी सी नादान थी, वही तो मेरी धड़कन, वही मेरी जान थी, एक सीधा-साधा सा लड़का, मेरी दुनिया बन गया, बिखरी हुई इस जिंदगी में, खुबसूरत सा रंग भर गया...! अब यादों के झरोखे में, वही चेहरा पुराना है, वो गुजरा हुआ कल जैसे, कोई हसीन ज़माना है, फासले चाहे जो भी हों, पर वो दिल के पास रहता है, मेरी हर एक धड़कन में, बस उसका नाम बहता है...! 🙏 जय हिंद 🙏   आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● फासले चाहे जो भी हों, पर वो दिल के पास रहता है— क्या आप भी मानते हैं क...

तू ही मेरी इबादत

Image
  ★ तू ही मेरी इबादत ★ मैं ढूँढूँ दुनिया में खुद को, जैसे कोई पर्वत खड़ा, तू मिल जाए तो लगता है, मेरा सफर बस अब है बढ़ा, वो पत्थर जैसी सीने की धड़कन, तुझसे ही मचलती है, तेरे आँचल की छाँव मिले तो, रूह मेरी संभलती है, तू है सुकून मेरा, तू ही है मेरा हर रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! सजे हों छप्पन भोग भले, महकती हो ये थालियाँ, तेरे बिना फीकी लगती हैं, ये सब रंग-बिरंगी खुशियाँ, जैसे कान्हा को तुलसी भाए, बिन उसके भोग अधूरा है, तेरा साथ न हो जो साथ मेरे, तो जग ये सब कोरा है, तू सावन की पहली बूंद, मैं प्यासी जमीं का रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! दुनिया की तलवारें लेकर, मैंने तो जग को जीत लिया, पर तुझसे जो एक लफ्ज़ सुना, मैंने खुद को जीत लिया, बड़े-बड़े सम्राट झुके, जो तेरी आँखों के आगे, जीत का असली गहना तो, बस तेरी सादगी में जागे, तू ही मेरी जीत की मंजिल, तू ही मेरा इकलौता राब्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! एक तू है, जो कर्म की राह में, मेरी ढाल बन जाती है, एक मैं हूँ, जो श्रद्धा में तेरी, खुद को भूल जाता हूँ, ये सृष्टि क...

मेरा बिलासपुर

Image
★ मेरा बिलासपुर ★ अरपा की ये लहरें देखो, जैसे गीत सुनाती हैं, बिलासपुर की माटी हम पर, स्नेह सदा बरसाती है, धीमी-धीमी शाम यहाँ की, दिल को सुकून दे जाती है, शहर की ये हलचल भी, एक राग नया गाती है...! रतनपुर की पावन छाया, मन में विश्वास जगाती है, माँ महामाया के चरणों में, दुनिया झुकने आती है, खूंटाघाट की शांत झील, दर्पण सी जो दिखती है, सूरज की उन किरणों में, यादें नई-नई खिलती है...! कानन पेंडारी की गलियों में, बचपन आज भी खेलता है, शहर के कोने-कोने में, अपनापन ही मिलता है, गांधी चौक की रौनक देखो, जैसे धड़कन धड़कती है, बिलासपुर की शाम यहाँ पर, सितारों सी चमकती है...! बिलासा ताल की लहरों में, शहर का अक्स उभरता है, सुकून भरी उन शामों में, मन हर पल निखरता है, शांत जल की गहराई में, खुशियाँ जैसे बहती हैं, बिलासा की गौरव गाथाएं, हवाएं यहाँ की कहती हैं...! विकास के इन रास्तों पर, हम आगे बढ़ते जाते हैं, पर अपनी पुरानी यादों को, सीने से लगाए रखते हैं, सिर्फ एक शहर नहीं ये, ये रूह का एक ठिकाना है, बिलासपुर ही अपना घर है, यहीं उम्र भर मुस्कुराना है...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️...